16 January, 2013

प्रयास-16


(16)

सफलता को सिर न चढ़ाओ, असफलता से न घबराओ,
सर्वस्व उसी को अर्पण करो और जो हो गया उसे बिसराओ।

समय किसी के लिये नही रुकता,
जीवन किसी के साधे नही सधता,
दुःख की काली रात भी बीत जाएगी,
सूर्य निकलेगा, न घबराओ,
सर्वस्व उसी को अर्पण करो और जो हो गया उसे बिसराओ।

अपनों की उपेक्षा से दुःख मिलेगा,
अपनों से अपेक्षा में भी दुःख मिलेगा,
अपने कर्तव्यों का ध्यान करो,
कर्म करो, न डगमगाओ,
सर्वस्व उसी को अर्पण करो और जो हो गया उसे बिसराओ।

सुख और दुःख, दोनो क्षणिक होते हैं,
अपने कर्मों को ही हम, भविष्य के लिये बोते हैं,
जो मिले, निरपेक्षता से अपनाओ,
सर्वस्व उसी को अर्पण करो और जो हो गया उसे बिसराओ।

- दीपक शिरहट्टी, 16/01/2013