26 June, 2015

प्रयास-23


(23)

इस बारिश में दो इन्द्रधनुष,

इक बादल में इक आंखों में,

थी प्यारी ख़ुशबू बसी हुई,

कुछ माटी में कुछ सांसों में।

 

मंजर भी था सब धुला हुआ,

अहसास भी था कुछ घुला हुआ,

इक क्षण को चमका सूरज सा,

इक बादल में इक आंखों में।

 

चमकीली बून्दें पानी की,

गिर रहीं थी नभ से इधर उधर,

दो अक्स थे उसके बने हुए,

इक बादल में इक आंखों में।

 

थी प्यारी ख़ुशबू बसी हुई,

कुछ माटी में कुछ सांसों में,

इस बारिश में दो इन्द्रधनुष,

इक बादल में इक आंखों में
दीपक शिरहट्टी, 26/06/2015

प्रयास-22

(22)
अभी फ़ुर्कत है, अभी मिलने में थोड़ी सी कमी है,
आंख हंसती नहीं, सांसों में भी, थोड़ी सी नमी है।
 
दिल की राहों में, तुझे ढूंढता हूं, ऐ मेरे हमदम,
तनहाइयां हैं दूर तलक, तू जो नही है,
आंख हंसती नहीं, सांसों में भी, थोड़ी सी नमी है,
अभी फ़ुर्कत है, अभी मिलने में थोड़ी सी कमी है।
मेरे मरने का सबब, इस ज़मानें के सितम हैं,
मेरी रुसवाइयों में, ज़िक्र तेरा, सिर्फ़ नही है,
आंख हंसती नहीं, सांसों में भी, थोड़ी सी नमी है,
अभी फ़ुर्कत है, अभी मिलने में थोड़ी सी कमी है।
 
(फ़ुर्कत = जुदाई/विरह/अनुपस्थिती)
- दीपक शिरहट्टी, 29/11/2013