(23)
इस
बारिश में दो इन्द्रधनुष,
इक
बादल में इक आंखों में,
थी
प्यारी ख़ुशबू बसी हुई,
कुछ
माटी में कुछ सांसों में।
मंजर
भी था सब धुला हुआ,
अहसास
भी था कुछ घुला हुआ,
इक
क्षण को चमका सूरज सा,
इक
बादल में इक आंखों में।
चमकीली बून्दें पानी
की,
गिर रहीं थी नभ से
इधर उधर,
दो अक्स थे उसके बने
हुए,
इक बादल में इक
आंखों में।
थी
प्यारी ख़ुशबू बसी हुई,
कुछ
माटी में कुछ सांसों में,
इस
बारिश में दो इन्द्रधनुष,
इक बादल में इक आंखों में।
दीपक शिरहट्टी, 26/06/2015