20 February, 2013

प्रयास-17


(17)

इश्क की बारिशों में, डूब कर, समझो इशारा,
इस महकती शाम में, तुझको पुकारे, दिल हमारा।

हवाओं में है ठण्डक, दिल में है, गर्मी की धड़कन,
के सांसों में है महका, गुल तुम्हारा।
इस महकती शाम में, तुझको पुकारे, दिल हमारा,
इश्क की बारिशों में, डूब कर, समझो इशारा।

फिज़ां के भेस में, बिखरे, तेरी ज़ुल्फों के साये,
के लालिमा में है, बिखरा, खूं हमारा।
इस महकती शाम में, तुझको पुकारे, दिल हमारा,
इश्क की बारिशों में, डूब कर, समझो इशारा।

आ भी जा अब के, दिल में, प्यार के, उठते हैं शोले,
के शोलों में है, जलता, मन हमारा।
इश्क की बारिशों में, डूब कर, समझो इशारा,
इस महकती शाम में, तुझको पुकारे, दिल हमारा।

- दीपक शिरहट्टी, 20/02/2013