(27)
मिली हैं रूहें तो फिर, जिस्म भी मिल जाने दो,
रिवाज़ क्या है सब, बन्दिशें मिट जाने दो,
मिली हैं रूहें...
रिवाजों के भंवर में, फंस चली है दुनिया तो,
न जानती है न कुछ, बूझती है दुनिया तो,
चलो भी साथ मेरे, ख्वाहिशें खिल जाने दो,
मिली हैं रूहें तो फिर, जिस्म भी मिल जाने दो,
रिवाज़ क्या है सब, बन्दिशें मिट जाने दो,
मिली हैं रूहें...
ये कायनात बनी है, मचल के खिलने से,
तेरे मेरे ही दिलों के, पिघल के मिलने से,
नज़र को और तराशो, आह सिमट जाने दो,
मिली हैं रूहें तो फिर, जिस्म भी मिल जाने दो,
रिवाज़ क्या है सब, बन्दिशें मिट जाने दो,
मिली हैं रूहें...
- दीपक शिरहट्टी, 03/05/2019