03 May, 2019

प्रयास-27

(27)

मिली हैं रूहें तो फिर, जिस्म भी मिल जाने दो,
रिवाज़ क्या है सब, बन्दिशें मिट जाने दो,
मिली हैं रूहें...

रिवाजों के भंवर में, फंस चली है दुनिया तो,
न जानती है न कुछ, बूझती है दुनिया तो,
चलो भी साथ मेरे, ख्वाहिशें खिल जाने दो,
मिली हैं रूहें तो फिर, जिस्म भी मिल जाने दो,
रिवाज़ क्या है सब, बन्दिशें मिट जाने दो,
मिली हैं रूहें...

ये कायनात बनी है, मचल के खिलने से,
तेरे मेरे ही दिलों के, पिघल के मिलने से,
नज़र को और तराशो, आह सिमट जाने दो,
मिली हैं रूहें तो फिर, जिस्म भी मिल जाने दो,
रिवाज़ क्या है सब, बन्दिशें मिट जाने दो,
मिली हैं रूहें...

                                                                                - दीपक शिरहट्टी, 03/05/2019

02 July, 2016

प्रयास-26

(26)

कभी बेपनाह बरसें, कभी कुछ गुम सी हैं,
ये बारिशें भी, सनम, तुम सी हैं।

ज़िन्दगी तुझसे, हमने, चाहा बहुत,
पर इनायत जो हुई वो, जरा कम सी हैं,
ये बारिशें भी, सनम, तुम सी हैं
कभी बेपनाह बरसें, कभी कुछ गुम सी हैं।

तुझसे मिलने का, ये मौसम है सनम,
दिल में बजती हुई, इक धुन सी है,
ये बारिशें भी, सनम, तुम सी हैं
कभी बेपनाह बरसें, कभी कुछ गुम सी हैं।

तू भी आ जा कभी, बारिशों की तरह,
हमको चाहत तेरी, रुनझुन की है,
ये बारिशें भी, सनम, तुम सी हैं
कभी बेपनाह बरसें, कभी कुछ गुम सी हैं।

कभी बेपनाह बरसें, कभी कुछ गुम सी हैं,
ये बारिशें भी, सनम, तुम सी हैं।


- दीपक शिरहट्टी, 02/07/2016

प्रयास-25

(25)

मतलबी दुनिया में अभी भी सच्चे हैं
रंगबिरंगे सदाबहार फूलों के गुच्छे हैं
क्या सुनाऊं दुनिया को मेरे मित्रों के किस्से
पचास के हो गये पर अभी भी बच्चे हैं।

चिन्ता शरीर की और सर भी तो गंजे हैं,
हाथ पांव लुंज पुंज और ढीले हो रहे पंजे हैं
क्या सुनाऊं दुनिया को मेरे मित्रों के किस्से
पचास के हो गये पर अभी भी बच्चे हैं।

दूसरों को ज्ञान दें पर आपस में टुच्चे हैं
प्यार से झगड़ते हैं, बहुत ही लुच्चे हैं
क्या सुनाऊं दुनिया को मेरे मित्रों के किस्से
पचास के हो गये पर अभी भी बच्चे हैं।

घरवालों से झूट बोल, देते वो गच्चे हैं
आपस में मिलने के लिये, करते मगज पच्चे हैं
क्या सुनाऊं दुनिया को मेरे मित्रों के किस्से
पचास के हो गये पर अभी भी बच्चे हैं।


          - दीपक शिरहट्टी, 28/06/2016

22 August, 2015

प्रयास-24

(24)
इतना तो असर होगा मेरी यादों का,
कि कभी तुम, बस, यूं ही, मुस्कुराओगे,
ख़यालों में ही क्यो न हो,
पल भर, बस, यूं ही, क़रीब तो लाओगे।

हवा के झोंके सा, तुम्हे छू जायेगा,
वो पल, जिसे बेसाख़्ता, बस, यूं ही, जी जाओगे।

जब भी अकेले मिलोगे, अपने आप से,
मेरा अक्स, बस, यूं ही, साथ पाओगे।

हंसी खुशी के बेहेतरीन क्षणों में,
मेरा गीत, बस, यूं ही, गुनगुनाओगे।

इतना तो असर होगा मेरी यादों का,
कि कभी तुम, बस, यूं ही, मुस्कुराओगे,
ख़यालों में ही क्यो न हो,
पल भर, बस, यूं ही, क़रीब तो लाओगे।


-          दीपक शिरहट्टी, 22/08/2015

26 June, 2015

प्रयास-23


(23)

इस बारिश में दो इन्द्रधनुष,

इक बादल में इक आंखों में,

थी प्यारी ख़ुशबू बसी हुई,

कुछ माटी में कुछ सांसों में।

 

मंजर भी था सब धुला हुआ,

अहसास भी था कुछ घुला हुआ,

इक क्षण को चमका सूरज सा,

इक बादल में इक आंखों में।

 

चमकीली बून्दें पानी की,

गिर रहीं थी नभ से इधर उधर,

दो अक्स थे उसके बने हुए,

इक बादल में इक आंखों में।

 

थी प्यारी ख़ुशबू बसी हुई,

कुछ माटी में कुछ सांसों में,

इस बारिश में दो इन्द्रधनुष,

इक बादल में इक आंखों में
दीपक शिरहट्टी, 26/06/2015

प्रयास-22

(22)
अभी फ़ुर्कत है, अभी मिलने में थोड़ी सी कमी है,
आंख हंसती नहीं, सांसों में भी, थोड़ी सी नमी है।
 
दिल की राहों में, तुझे ढूंढता हूं, ऐ मेरे हमदम,
तनहाइयां हैं दूर तलक, तू जो नही है,
आंख हंसती नहीं, सांसों में भी, थोड़ी सी नमी है,
अभी फ़ुर्कत है, अभी मिलने में थोड़ी सी कमी है।
मेरे मरने का सबब, इस ज़मानें के सितम हैं,
मेरी रुसवाइयों में, ज़िक्र तेरा, सिर्फ़ नही है,
आंख हंसती नहीं, सांसों में भी, थोड़ी सी नमी है,
अभी फ़ुर्कत है, अभी मिलने में थोड़ी सी कमी है।
 
(फ़ुर्कत = जुदाई/विरह/अनुपस्थिती)
- दीपक शिरहट्टी, 29/11/2013

24 April, 2014

प्रयास-21


(21)
 
बहारें आती थी कुछ देर के लिये पर
याद ख़िजां में गिरते फूल रहा करते थे
तुझे देखा तो ख़ुदा पे यकीं आ गया
वरना हमें तो सिर्फ इंसान दिखा करते थे
 
ज़िन्दगी ने हमें बहुत कुछ दिया था
पर जीवन की कमियों को गिना करते थे
तूने मुस्कुराहटों में जीना सिखाया
वरना हमें तो सिर्फ आंसू दिखा करते थे
 
ऊपरवाले से, अपने लिये सारी ख़ुदाई चाहते थे
अपने लिये जीते थे, औरों की बात नहीं करते थे
तूने दुनिया से प्यार करना सिखाया
वरना हमें तो सिर्फ हम दिखा करते थे
 
-          दीपक शिरहट्टी, 24/04/2014