(22)
अभी फ़ुर्कत है, अभी मिलने में थोड़ी सी कमी है,
आंख हंसती नहीं, सांसों में भी, थोड़ी सी नमी है।
दिल की राहों में, तुझे ढूंढता हूं, ऐ मेरे हमदम,
तनहाइयां हैं दूर तलक, तू जो नही है,
आंख हंसती नहीं, सांसों में भी, थोड़ी सी नमी है,
अभी फ़ुर्कत है, अभी मिलने में थोड़ी सी कमी है।
मेरे मरने का सबब, इस ज़मानें के सितम हैं,
मेरी रुसवाइयों में, ज़िक्र तेरा, सिर्फ़ नही है,
आंख हंसती नहीं, सांसों में भी, थोड़ी सी नमी है,
अभी फ़ुर्कत है, अभी मिलने में थोड़ी सी कमी है।
(फ़ुर्कत =
जुदाई/विरह/अनुपस्थिती)
- दीपक शिरहट्टी, 29/11/2013
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