(26)
कभी बेपनाह बरसें,
कभी कुछ गुम सी हैं,
ये बारिशें भी, सनम,
तुम सी हैं।
ज़िन्दगी तुझसे,
हमने, चाहा बहुत,
पर इनायत जो हुई वो,
जरा कम सी हैं,
ये बारिशें भी, सनम,
तुम सी हैं
कभी बेपनाह बरसें,
कभी कुछ गुम सी हैं।
तुझसे मिलने का, ये
मौसम है सनम,
दिल में बजती हुई,
इक धुन सी है,
ये बारिशें भी, सनम,
तुम सी हैं
कभी बेपनाह बरसें,
कभी कुछ गुम सी हैं।
तू भी आ जा कभी,
बारिशों की तरह,
हमको चाहत तेरी,
रुनझुन की है,
ये बारिशें भी, सनम,
तुम सी हैं
कभी बेपनाह बरसें,
कभी कुछ गुम सी हैं।
कभी बेपनाह बरसें,
कभी कुछ गुम सी हैं,
ये बारिशें भी, सनम,
तुम सी हैं।
- दीपक शिरहट्टी, 02/07/2016
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