सर उठा कर चल पड़े हैं, ज़िन्दगी की रहग़ुज़र पर
जीत लेंगे हर वो बाजी, सत्य की सीधी डगर पर।
लोभ, मद और क्रोध तो दिखलाएंगे मंज़िल को पास
सत्य ही ले जायेगा, अन्त में हमें सुख के सफ़र पर।
दुश्मनों तुम पास रख लो भ्रष्ट अपने रास्-ते
जीत हमको ही मिलेगी, ईमान की इस राह पर।
झूठ वालों ये न सोचो डर के हम हट जाएंगे
हम ही लहराएंगे झंडा, इस हिमालय के शिखर पर।
- दीपक शिरहट्टी
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