जा अब दोस्तों के साथ,
खेल मस्ती से होली,
क्यों टेंशन लेता है इतना,
जो होनी थी सो हो-ली।
भगवान को कर रंग अर्पण,
माता-पिता और बुजुर्गों को तिलक लगा,
उनका आशीर्वाद ले और,
परिवार में आनन्द जगा,
फिर चुपके से कर,
प्रियतम के संग ठिठोली,
अब बस भी कर ले मितरा,
जो होनी थी सो हो-ली।
लड्डू चिवड़े का आनन्द,
भांग के भजियों की गन्ध,
होलिका को पूरण का भोग
और खुद के लिये पूरण पोली,
अरे क्यों टेंशन लेता है प्यारे,
जो होनी थी सो हो-ली।
देख कौन कौन दोस्त आया है,
लाल, पीले और हरे रंग लाया है,
अब तू भी निकल,
बना दोस्तों की टोली,
अब फायनली उठ जा पापे,
जो होनी थी सो हो-ली।
- दीपक शिरहट्टी, 06/03/2012
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