हो रही बारिश, सुहानी शाम घिर के आ रही,
सूर्य भी शरमा रहा, काली घटाएं छा रही,
पंछियों ने नीड़ में आश्रय लिया, सब छोड़ के,
हमपे भी इस शाम की थोड़ी खुमारी छा रही।
सोचता हूं, भीगते ही बाग़ में बैठा रहूं,
या के फिर, परिवार के संग लॉन्ग ड्राइव पे चलूं,
चाय के संग प्लेट भजियों की मंगाई जा रही,
हमपे भी इस शाम की थोड़ी खुमारी छा रही।
बात जब घर मे चलाई, इन विकल्पों के लिये,
लग गये सब सोचने अपने जवाबों के लिये,
उठ के फिर से बीच में टी.व्ही. की बातें आ रही,
हमपे भी इस शाम की थोड़ी खुमारी छा रही।
बच्चियों का मूड ठण्डा, आई भी राज़ी नहीं,
कोई भी घर छोड़ के, यूं घूमने जाये नहीं,
अंजली भी फ़िल्म देखे, टी.व्ही. पे जो आ रही,
हमपे अब इस शाम की कोई खुमारी ना रही।
- दीपक शिरहट्टी, 12/07/2010
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