ऐ मेरे मन, बता तू क्या चाहता है,
क्यों हासिल खुशियों को छोड़, सपनों के पीछे भागता है,
माना कि सपने होते हैं ज़रूरी, जीने के लिये,
पर क्यों कल के लिये, आज के आनन्द को टालता है।
देख तेरे आज में कितना सुख धरा है,
तेरा पूरा संसार छोटी – छोटी ख़ुशियों से भरा है,
भर ले अपनी मुट्ठी में ओस के ये मोती,
बहता पानी तो किसी बन्धन को नही मानता है,
माना कि सपने होते हैं ज़रूरी, जीने के लिये,
पर क्यों कल के लिये, आज के आनन्द को टालता है।
बड़ी चाहतों की चाह में,
दुनिया की विविधताओं से भरी राह में,
मंज़िल पाने कि कोशिशों में,
तू क्यों रास्ते की सुन्दरता को कम आंकता है,
माना कि सपने होते हैं ज़रूरी, जीने के लिये,
पर क्यों कल के लिये, आज के आनन्द को टालता है।
रौशनी की चकाचौन्ध में तू दीवाना हो रहा है,
भौतिकता की दौड़ में अपनों से बेगाना हो रहा है,
पर शाम के धुंधलके में जुगनुओं का टिमटिमाना ही,
ऐ मन, क्यों तुझे, मुझ से बांधता है,
माना कि सपने होते हैं ज़रूरी, जीने के लिये,
पर क्यों कल के लिये, आज के आनन्द को टालता है।
- दीपक शिरहट्टी, 03/03/2012
1 comment:
SIR
It's awesome. it just not only a poetry while it's a complete lesson in itself to live each moment of the life in unforgetable manner.
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